8th Indian International Science Festival
8th Indian International Science Festival

भोपाल। मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) में चल रहे आठवें इंडियन इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में बेहद खास रहा। एक तरफ जहां स्कूली बच्चों ने हॉन्कांग का जीनियस वर्ल्ड रिकॉर्ड ब्रेक कर इतिहास रचा। वहीं, दूसरे सत्रों में विज्ञान पर केंद्रित कविता के पठन-पाठन का सिलसिला चला। यही नहीं देश के विभिन्न देशों से आये वैज्ञानिकों ने विज्ञान में हो रहे नवाचारों से स्टूडेंट्स को परिचित भी कराया और विज्ञान में करियर के ऑप्शन के बारे में चर्चा की।

देशभर से आए कवियों ने किया कविता पाठ-

विज्ञानिका के अंतर्गत साइंस लिट्रेरचर फेस्टिवल में विज्ञान कवि सम्मेलन हुआ। इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से आए 10 कवियों ने अपनी-अपनी रचनाओं को सुनाकर हॉल में उपस्थित श्रोताओं को मुग्ध किया। इस सत्र की अध्यक्षता कवि और लेखक श्री संतोष चौबे ने की।

इस अवसर पर कवि और अभिनेता नीलेश मालवीय विशेष रुप से उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत में सारिका घारू ने विज्ञान के क्षेत्र में नारी शक्ति की बढ़ती भागीदारी पर आधारित कविता विज्ञान से नारी सशक्तिरण नहीं है हमारा नारा… को सुनाया।

इसके बाद लखनऊ से आए पंकज प्रसून ने आई है वो जीवन में तूफान की तरह…, कविता को सुनाया। विशाल मालवीय ने हाईड्रोजन न हिंदू होता है, मैग्नीशियम न मुसलमान… रचना को सुनाकर वाहवाही पाई। कविता और शेर-ओ-शायरी के कारवां को आगे बढ़ाते हुए जौनपुर की शुचि मिश्रा, दिनेश चमोला, मोहन सगोरिया और सुधीर सक्सेना ने अपनी कविताओं और कलामों को पेशकर हर श्रोता को प्रफुल्लित कर दिया।

विज्ञान के नवाचारों से फिर विश्वगुरु बनेगा भारत-

आजादी के 100 वर्ष पूर्ण होने पर भारत की अर्थव्यव्स्था और उसमें विज्ञान के योगदान को लेकर विजन फॉर इंडियन इकोनॉमी इन नेक्स्ट 25 ईयर्स- ए न्यू एज टेक्नोलॉजी पर्सपेक्टिव विषय पर पैनल डिस्कशन हुआ। इसमें विज्ञान के अलग-अलग प्रभागों में सराहनीय कार्य कर रहे विद्वानों ने सार्थक चर्चा की। आईआईटी दिल्ली के अस्सिटेंट प्रोफेसर डॉ. रोहन पॉल ने कहा कि हमारी संस्कृति वसुधैव कुटम्बकम की रही है।

हम अपने यहां कुछ भी विकास करते हैं तो उसे दुनिया के हर कोने तक पहुंचाने का प्रयत्न करते हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में जब हमारे देश के वैज्ञानिकों ने वैक्सीन बनाई तो हमने न सिर्फ अपने देश के जन-जन तक पहुंचाई बल्कि दूसरे देशों में भी भेजी ताकि कोरोना से विश्व का बचाव कर सकें। इसका अर्थ है कि हम जो भी टेक्नोलॉजी को विकसित कर रहे हैं, वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से कर रहे है।

विकास के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर है जरुरी-

स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, विजयवाडा़ के प्रोफेसर डॉ. रमेश कोंडा ने बताया कि किसी भी देश की अर्थव्यवस्था इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर रहती है। यदि हम अपने देश में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करते हैं, तो देश में विकास के नए आयाम स्थापित होंगे। इसके लिए जरुरी है कि जीएस बेस्ट प्लानिंग बनाई जाए। जो टाउन से लेकर सिटी और सिटी से लेकर रीजन तक हो। इसमें टाउन प्लानिंग के साथ है इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर भी रोडमैप तैयार किया जाए। इसमें हमारी रेसिडेंशियल और कमर्शियल सभी तरह की प्लानिंग हो साथ ही नैचुरल डिजास्टर से लड़ने के लिए भी हम तैयार रहें।

1484 बच्चों ने रोबोट डिजाइन कर बनाया रिकॉर्ड-

सोमवार सुबह मेनिट परिसर में रोबोट मेकिंग एक्टिविटी का आयोजन किया गया। इस एक्टिविटी में विभिन्न स्कूलों के 1600 स्टूडेंट्स शामिल हुए। इस दौरान 1484 स्टूडेंट्स ने एक साथ रोबोट डिजाइन कर चीन के हॉन्कांग का रिकॉर्ड तोड़ते हुए गिनीज वल्र्ड रिकॉर्ड का नया कीर्तिमान स्थापित किया। बच्चों की हौसला अफजाई के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री श्री ओमप्रकाश सखलेचा मुख्य रूप से उपस्थित हुए।

इस दौरान मंत्री सखलेचा ने कहा कि इस तरह के रोबोट को डिजाइन कर चीन के हाँगकाँग का रोबोट मेकिंग में रिकॉर्ड तोड़ा गया है लेकिन मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में भारत के युवा चीन का हर रिकॉर्ड तोड़ कर सशक्त भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे।

किट लेकर उत्साह से पहुँचे स्टूडेंट्स-

रिकॉर्ड एक्टिविटी में हिस्सा लेने के लिए स्टूडेंट्स में खासा उत्साह देखने को मिला। इस दौरान भोपाल के विभिन्न स्कूलों से आये स्टूडेंट्स अपनी किट और स्टेशनरी का समान लेकर फेस्टिवल के मेन डोम में पहुँचे। बच्चों को मेन डोम में एक-एक कर अंदर प्रवेश दिया गया। इस दौरान बच्चों ने कार्ड बोर्ड, टायर, स्प्रिंग आदि का उपयोग कर ऐरो रोबोट असेम्बल करने का टास्क मेहनत और डेडिकेशन के साथ पूरा कर चीन के हाँगकाँग का रिकॉर्ड ब्रेक किया।

स्टार्टअप्स के जरिए 67 हजार से अधिक को मिला रोज़गार-

स्टार्टअप को आइडिया से प्रोटोटाइप के स्तर पर ले जाने के लिए अनेक सुविधाएँ दी जाती है। इसमें स्टार्टअप्स की चुनौतियों की पहचान और युवाओं को उनके समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया जाता है। इन प्रयासों का लाभ अब तक लगभग 12 हजार से अधिक स्टार्टअप्स उठा चुके हैं, जिनकी वैल्यूएशन मार्केट में 37 हजार करोड़ रुपए आँकी गई है। इन स्टार्टअप्स ने 67 हजार से अधिक लोगों को रोज़गार देने का काम भी किया है।

मेंटरिंग और काउंसलिंग सत्र में एमर्जिंग ट्रेंड्स एंड समानांतर कॅरियर इन स्टेम विषय पर डिपार्टमेन्ट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी से साइंटिस्ट और हेड एनएसटीईडीबी अनिता गुप्ता, विज्ञान प्रसार के साइंस कम्युनिकेटर बी. के. त्यागी, बीएससी बायोनेस्ट की चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर सुमन गुप्ता, डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी (डीबीटी) के साइंटिस्ट डॉ. गुलशन ने अपनी बातें रखीं। अनिता गुप्ता ने युवाओं को डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं से अवगत कराया।

उन्होंने कहा कि स्कूल से लेकर कॉलेज के स्तर तक इंस्पायर और वित्त प्रयास जैसी योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। इसमें अपने स्टार्टअप आइडिया को मूर्तरूप देने के लिए 10 हजार से लेकर 10 लाख रूपए तक की सहायता प्रदान की जाती है। यह आर्थिक सहायता युवाओं को स्टार्टअप को आइडिया से प्रोटोटाइप के स्तर पर ले जाने के लिए दी जाती है। बी.के त्यागी ने साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथमेटिक्स स्टडीज के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि आज अमेरिका जैसे देशों में स्टेम सब्जेक्ट पढ़ने वालों की तादाद कम होती जा रही है, इसलिए भारतीय अक्सर दिग्गज टेक्नोलॉजी कम्पनियों में बड़े स्थान पर दिखाई देते रहे हैं।लेकिन हमारे यहाँ पढ़ाई का तरीका काफी अलग है। हम अभी भी पढ़ाई में प्रयोग को कम शामिल करते हैं, हम साइंस को हिस्ट्री की तरह ज्यादा पढ़ते हैं। इस ट्रेंड को बदलने की जरूरत है।

वैक्सीनेशन निर्माण में भारत की अहम भूमिका-

लर्निंग रिसोस सेंटर में न्यू एज टेक्नोलॉजी-शो में जैव प्रोद्यौगिकी एवं कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञों ने अपनी बात रखी। इस दौरान जैव प्रोद्यौगिकी विभाग की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. अलका शर्मा बतौर मुख्य अतिथि, सीएमसी वेल्लोर की प्रोफेसर डॉ. गगनदीप कांग विशेष रूप से उपस्थित रही। देश की शीर्ष वायरोलॉजिस्ट डॉ. गगनदीप कांग ने कोविड-19 के इलाज और वैक्सीन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

उन्होंने बताया कि कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट कोई सामान्य वायरस नहीं था, चूंकि हम वैक्सीनेटेड थे, इसलिए यह ज्यादा घातक नहीं हो पाया। दूसरी ओर, दक्षिण अफ्रीकी देशों में डेल्टा वेरिएंट के फैलने की दर सबसे तेज थी, लेकिन इससे वहाँ मौतें ज्यादा नहीं हुईं।

इन देशों में ओमिक्रॉन ने भयावह स्थिति पैदा की। डॉ. अलका शर्मा ने कहा कि न्यू एज टेक्नोलॉजी के दौर में जब कोरोना भारत में आया तो देश की सभी एजेंसियों ने साथ मिल कर काम किया और हमने सबसे पहले वैक्सीन तैयार की। बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने विदेश मंत्रालय के साथ मिल कर वैक्सीन दूसरे देशों तक भी पहुँचाई।