Allotment of shops canceled
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भोपाल। नगर निगम द्वारा इन दिनों बकाया टैक्स को लेकर जो मुहिम चलाई जा रही है उसके तहत 7500 से ज्यादा संपत्तियाां नीलामी प्रक्रिया में डाल दी गई है और यह सिलसिला जारी है लेकिन इस बीच निगम की वसूली में कुछ ऐसी सख्ती बरती जा रही है कि 2-3 हजार रूपए बकाया होन पर भी आवंटन निरस्त की कार्रवाई की जा रही है।

नगर निगम ने भूभाटक समय पर न भरने वालों के खिलाफ कार्रवाई की-

ताजा मामला जोन क्रमांक 17 से जुड़ा है जहां जोनल अधिकारी ने गुमठी तक के आवंटन निरस्त कर दिए है। जानकारी के मुताबिक किराया और भूभाटक समय पर न भरनेवालों के खिलाफ यह कार्रवाई की गई जो कि जोन क्रमांक 17 के अंतर्गत आनेवाले टिंबर मार्केट में यह कार्रवाई हुई है।

निगम ने इस मामले मे बकायादा प्रेसनोट जारी कर जानकारी दी है जिसमें टिंबर मार्केट में मरियम्मा थामस के नाम से छोला स्थित टिंबर मार्केट में भूखंड क्रमांक 4 का आवंटन है इस पर महज 3105 रूपए बकाया है इतनी कम राशि के बावजूद मरियम्मा का आवंटन निरस्त कर दिया है।

अन्य मामला  टिंबर मार्केट का है-

एक अन्य मामला इसी टिंबर मार्केट का है जहां शिव्या त्रिपाठी पर बकाया 2070 रुपए जमा न करने पर आवंटन निरस्त की सूचना जारी की गई है। इसी तरह इसी मार्केट में 2070 रूपए बकाया जमा न करने पर इसरार मलिक का आवंटन निरस्त किया गया है। दरअसल हर जोन में 100 प्रापर्टी को नीलामी प्रक्रिया में लाने की कवायद के चलते यह हालात बने है।

ऐसे में कई जोन ऐसे भी है जहां इनसे बड़े बकायादार है लेकिन वे प्रथम 100 में शामिल न होने के कारण बच गए है लेकिन कई जगह गुमठी और झुग्गियों के बकाया टैक्स होने पर इनके आवंटन निरस्त करने से लेकर सरकारी योजनाओं के लाभ से इन्हें वंचित करने की कार्रवाई नगर निगम द्वारा की जा रही है।

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अधर में अटका हाथ ठेलेवालों से एक मुश्त तहबाजारी का मामला-

उधर नगर निगम द्वारा पार्किंग के बाद तहबाजारी का एक मुश्त सालाना राशि लेने का जो निर्णय लिया गया उस पर अमल नहीं हो पा रहा है। निगम ने इस मामले में स्टेंडिंग आर्डर भी जारी कर दिया लेकिन विभागीय अमला इसकी वसूली को लेकर गंभीर नहीं है। यही वजह है कि इस साल एक हजार की बजाए 500 रूपए लेने का फैसला करने के बावजूद इसकी वसूली वार्ड और जोन स्तर पर शिथिल हो गई है वहीं लाइसेंस बनाने का मामला भी अब धीमी गति से चल रहा है।

इससे जितनी आय इस सेक्टर में होने का अनुमान लगाया गया था उससे आधी भी नहीं हो पाई है। ज्ञात हो कि इस चालू वित्तीय वर्ष के खत्म होने में महज दो माह का समय बचा है ऐसे में हाथ ठेलेवालो से पूरी वसूली होना संभव दिखाई नहीं दे रहा है।

सूत्र बताते है कि निगम की नीतियों के तहत रेड जोन में लाइसेंस और तहबाजारी नियमों के तहत वसूली नहीं जाती जबकि एक बड़ा हिस्सा तहबाजारी का इसी रेड जोन से आता है अब नियमोंं की दुहाई देकर भी अधिकारी इसकी वसूली से बचते आ रहे है।