Bhopal : मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में चल रहे 8वें भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव में विभिन्न गतिविधियाँ हुई। मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के तत्वावधान में चार दिवसीय विज्ञान महोत्सव के इस उत्सव में वैज्ञानिक सोच रखने वाले युवाओं की विकासशील सोच का प्रदर्शन देखने को मिला। महोत्सवमें मूलरूप से स्टूडेंट्स विलेज, स्टार्टअप हब और आर्टिजन की गतिविधियाँ रही। एक तरफ जहाँ विजिटर्स ने विज्ञान और तकनीक से जुड़े इनोवेटिव आइडियाज पर विकसित किये गये प्रोडक्ट को देखा। वहीं, दूसरी ओर देश के विभिन्न शहरों से आये कलाकारों ने पारंपरिक कलाकृतियों को प्रदर्शित कर विजिटर्स को आकर्षित किया।

परफ्यूम और क्रीम कर सकेंगे रिफिल

इंदौर से आये मनोज पटेल ने एक ऐसा प्रोडक्ट प्रदर्शित किया है जो आपको नये प्रोडक्ट की पैकिंग पर लगने वाली कीमत से बचायेगा। मनोज ने रिफिल स्टेशन तैयार किया है, जो परफ्यूम और क्रीम जैसे प्रोडक्ट को ऱिफिल कर देगा। मनोज ने बताया कि इस रिफिल स्टेशन में एक क्यू.आर. कोड लगा हुआ है। क्यूआर कोड स्केन करते ही मोबाइल पर ऑप्शन दिखायेगा कि आपको कौन सा प्रोडक्ट रिफिल करना है। उस प्रोडक्ट को सिलेक्ट करते ही उसके नीचे उसकी पुरानी बॉटल रखने पर कुछ ही समय में वह पूरी भर जायेगी। मनोज कहते हैं कि रिफिल स्टेशन पर लगभग 10 लीटर का कंटेनर लगा हुआ है। इसमें हर प्रोडक्ट के लिए अलग से कंटेनर लगाया गया है।

ब्लड सैंपल को खराब होने से बचायेगा मिनी रेफ्रिजरेटर

दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट मनीष नोटियाल ने एक ऐसा प्रोडक्ट डिजाइन किया है जो हेल्थ सेक्टर में काम करने वाले लोगों के लिए काफी उपयोगी है। मनीष ने एक मिनी रेफ्रिजरेटर डिजाइन किया है जो ब्लड सैंपल और लीवर आदि को जरूरी ट्रेम्प्रेचर महज छह घंटे में उपलब्ध करा देगा। मनीष बताते हैं कि इस रेफ्रिजरेटर में हमने फेस चेंज मटेरियल का उपयोग किया है जो वॉटर, डायड्रोलिक सॉल्ट और नैनो पार्टिकल्स के इस्तेमाल से तैयार हुआ है। अभी अगर किसी ब्लड सैंपल या लीवर को तय ट्रेम्प्रेचर की आवश्यकता होती है तो उसे 24 घंटे का समय लगता है, लेकिन यह मिनी रेफ्रिजरेटर तय ट्रेम्प्रेचर केवल 6 घंटे में उपलब्ध करा देता है। इस बैग को डिजाइन करने में पफ और डोबी फ्रेबरिक का उपयोग किया गया है।

किसानों की परेशानी को दूर करेगी यह डिवाइस

गुवाहाटी से आये नवरात्री इनोवेशन की टीम ने खेतों में किसानों को होने वाली परेशानियों को राहत देने के लिए विशेष स्मार्ट फ्रेमिंग आईआईओटी डिवाइस तैयार की है। यह डिवाइस मिट्टी की नमी, ट्रेम्प्रेचर, हवा की स्पीड और ह्यूमिडिटी की जानकारी मोबाइल फोन पर देती है। टीम के सदस्य ने बताया कि इस डिवाइस में चार सेंसर का यूज किया गया है जो खेत के अलग-अलग स्थानों पर लगाये जाते हैं। डिवाइस का मेन स्विच मोटर पंप से कनेक्ट होता है। खेत में जब जितनी पानी की आवश्यकता होगी ऑटोमेटिक पंप स्विच ऑन करेगा, जिससे खेत में जरूरत के हिसाब से सिंचाई का पानी की सप्लाई हो जाएगी।

स्टूडेंट्स विलेज में क्रिएटिविटी और इनोवेशन का धमाल

साइंस विलेज में आये बच्चों ने क्रिएटिविटी और इनोवेशन से धमाल मचा रखा है। स्कूली बच्चों द्वारा तैयार किये गये इन मॉडल्स को देख लोगों ने बच्चों की क्रिएटिविटी की सराहना की है। विज्ञान मॉडल्स में बच्चों ने न सिर्फ केवल विज्ञान और तकनीकी की बारीकियों को दिखा कर समझाया, बल्कि रेखाचित्रों और चित्रकारी के जरिए फिजिक्स, कैमेस्ट्री, बायोलॉजी और इन्वायरमेंट साइंस के सूत्रों को समझाया और मानव विकास तथा विश्व कल्याण में विज्ञान की भूमिका को रेखांकित किया। बच्चों ने वैकल्पिक ऊर्जा के साधन के रूप में बायोगैस प्लांट से गैस उत्पादन का मॉडल बनाया। इसमें 20 लीटर पानी एवं गोबर के घोल से एक दिन में चार बार चाय बनाने भर की गैस का उत्पादन किया गया।

शिक्षा में प्रदेश की प्रगति को किया प्रदर्शित

प्रदेश के विभागों द्वारा लगाई विशेष प्रदर्शनी में शिक्षा के क्षेत्र की प्रगति को दिखाती एग्जीबिशन भी खास आकर्षण का केंद्र बनी। जनजातीय कार्य विभाग द्वारा सीएम राइज स्कूल योजना को शामिल किया गया है। इसमें प्रदेश के जनजातीय जिलों में निर्मित होने वाले विभागीय 95 सीएम राइज स्कूल के चुनिंदा कॉन्सेप्ट प्लान, बिल्डिंग का एरियर व्यू, प्री-नर्सरी एवं सीनियर क्लॉस रूम और स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स की पैनल प्रदर्शनी लगाई गई है।

यंग साइंटिस्ट ने युवाओं को दिखाई नई राह

वैज्ञानिक सोच को लेकर आगे बढ़ने वाले युवाओं को सही दिशा देने के उद्देश्य से यंग साइंटिस्ट कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इसमें देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, संस्थानों में कार्यरत वैज्ञानिकों ने विज्ञान के क्षेत्र में कॅरियर बनाने वाले युवाओं का मार्गदर्शन किया और देश में होने वाले वैज्ञानिक अनुसंधानों की बारीकियों से परिचित कराया। एडवाइजर एंड हेड स्टेट साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रोग्राम डॉ. देवप्रिया दत्ता ने कहा कि अभी राज्यों में जो स्टेट काउंसिल है हम उनके साथ बैठकर चर्चा कर रहे हैं और यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि इनकी वीकनेस क्या है, स्ट्रेंथ क्या है, जिसमें आगे हम इन्हें कैटेलाइज करके एक मेपिंग कर सके और उसके बाद राज्यों में साइंस की दिशा में और बेहतर काम किया जा सके।

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आर्टिजन एक्स्पो में दिखी कला की बारीकियाँ

विज्ञान प्रदर्शनी में पहली बार आर्टिजन एक्स्पो लगाया गया। इस एक्स्पो में देश के विभिन्न राज्यों से आये पारंपरिक कलाकार अपनी स्थानीय कला की बारीकियों को प्रदर्शित कर रहे हैं। हैंडीक्राफ्ट आइटम्स की बारीकियों से लेकर साड़ियों के निर्माण की कहानी को कलाकार, आर्टिजन उत्सव में आने वाले लोगों के साथ साझा कर रहे हैं। इसके अलावा कलाकारों ने मिट्टी, रस्सी आदि से तैयार किये जाने वाले डिफरेंट प्रोडक्ट प्रदर्शित किये हैं। मधुबनी बिहार से आये शिवम पासवान ने बिहार की पारंपरिक मधुबनी की कला पर लोगों से चर्चा की। उन्होंने बताया कि उन्होंने सिल्क साड़ी, दुपट्टे, वॉल हेंगिंग, सूट पर मधुबनी आर्ट को तैयार किया है।