भोपाल। शहर कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर हुई भारी रस्साकशी के बाद इंदौर से कांग्रेस नेता भोपाल पहुंचे। विनय बाकलीवाल भी साथ थे। हालांकि जब नेता पहुंचे तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने उन्हें मिलने का समय नहीं दिया। यह सभी नेता बंगले के बाहर इंतजार करते रहे। बताया जा रहा है कि शहर कांग्रेस कार्यालय गांधी भवन के बाहर हुए पुतला दहन, अनुशासनहीनता और फिर बाकलीवाल द्वारा दोबारा गांधी भवन पहुंचकर पदभार ग्रहण करने को लेकर कमलनाथ नाराज हैं।

जब इंदौर के नेता बंगले पर उनसे नहीं मिले तो फिर सभी प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचे। जहां सेवादल का कार्यक्रम चल रहा था। काफी देर इंतजार के बाद चलते-चलते एक-दो मिनट की मुलाकात हुई। बाकलीवाल और कांग्रेस नेताओं ने अरविंद बागड़ी को लेकर शिकायत की। नाथ ने कहा मुझे सारी जानकारी है। इसके बाद सभी को वापस जाने के लिए कहा तो लौट आए। यह सभी लोग आभार के नाम पर सफाई देने पहुंचे थे।

अध्यक्ष की नियुक्ति होल्ड पर, जिला प्रभारी जोशी संभालेंगे प्रभार

अब शहर अध्यक्ष का मामला आगामी आदेश तक होल्ड पर है। तब तक जिला प्रभारी महेंद्र जोशी शहर अध्यक्ष पद का प्रभार संभालेंगे। वे 26 जनवरी को गांधी भवन में झंडावंदन भी करेंगे। साथ ही भारत जोड़ो, हाथ से हाथ जोड़ो कार्यक्रम की कमान भी संभालेंगे।

विकास नहीं, निकास यात्रा है ये : कमलनाथ

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने बीजेपी की विकास यात्रा को ‘निकास यात्रा’ करार दिया है। उन्होने कहा कि ये इनकी फेयरवेल यात्रा है। उन्होने ये बात हरदा जिले के सिराली में पत्रकारों से बात करते हुए कही। उन्होने कहा कि ‘पूरे प्रदेश का सत्यानाश हो रहा है। हमारे नौजवानों का सत्यानाश, कृषि क्षेत्र का और औद्योगिकीकरण का सत्यानाश हो रहा है।’

शिवराज को बताया घोषणा मशीन

बीजेपी पर हमला बोलते हुए कमलनाथ ने कहा कि ‘शिवराज सिंह जी मुझसे पूछते हैं कि आपने अपना वचन पत्र पूरा नहीं किया। मैं इस बात को स्वीकार करता हूं। मेरे पास साढ़े 11 महीने थे , यदि मुझे पूरे 5 साल मिले होते तो वचन पत्र अवश्य पूरा किया होता। शिवराज जी अपने 18 वर्ष का हिसाब नहीं दे पा रहे हैं।

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पठान फिल्म को लेकर कही ये बात

फिल्म पठान का विरोध करने के मामले में उन्होने कहा कि ये स्वतंत्र देश है। जिनकी भावनाओं को ठेस पहुंचती है, वे अपना फैसला करें लेकिन विरोध करने से कुछ नहीं होगा। भारत जैसा कोई देश विश्व नहीं है जहां इतनी विविधताएं हैं और फिर भी एकता है। आज हमें एकतरफा ना सोच कर अपनी संस्कृति के बारे में सोचना चाहिए क्योंकि हमारी संस्कृति सभी को जोड़कर रखने की संस्कृति है।