Congress meeting : मध्यप्रदेश में इस साल होने वाले चुनाव को लेकर कांग्रेस काफी गंभीर दिख रही है। मिशन 2023 फतह करने के लिए प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ विशेष रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। इसी के मद्देनजर अब कांग्रेस आदिवासियों को रिझाने में जुट गई है। इसे लेकर प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने प्रदेश के सभी 28 आदिवासी विधायकों की बैठक की। खास बात यह है कि इस बैठक में आदिवासी वर्ग के पूर्व विधायक भी शामिल हुए हैं। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में कमलनाथ की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में आदिवासी आरक्षित 47 सीटों को लेकर रणनीति बनाई गई। पिछली बार कांग्रेस को 47 में से 30 सीटों पर जीत मिली थी। कांग्रेस अब आदिवासी सीटों पर समीकरण और प्लान बना रही है, इसे को लेकर मीटिंग में चर्चा और रायशुमारी हुई।

कमलनाथ ने बताया रूटीन बैठक

कांग्रेस आदिवासी विधायकों के साथ हुई बैठक को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि ये पार्टी की रूटीन बैठक है। उन्होंने कहा कि मप्र आदिवासी प्रदेश है, यहां अलग-अलग आदिवासी हैं और सबकी अलग-अलग परेशानियां हैं। कोई ये कह दे कि एक नीति से सबकी परेशानी हल हो जाएगी, तो ऐसा नहीं हो सकता है। कमलनाथ का इशारा हाल ही में प्रदेश में लागू किए गए पेसा एक्ट की तरफ था। उन्होंने कहा कि, हमने आज आदिवासियों की समस्याओं को देखते हुए यह बैठक की है और आदिवासियों की समस्याओं को लेकर इसमें चर्चा की गई है।

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भाजपा आदिवासियों को गुमराह कर रही

वहीं, इस बैठक को लेकर पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कांतिलाल भूरिया ने कहा कि आदिवासियों को उनका हक नहीं मिल रहा है। आज आदिवासी विधायकों से वन टू वन चर्चा कर उनकी समस्याएं जानी गईं। अधिकारी उनको वंचित करने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि, बीजेपी आदिवासियों को गुमराह कर रही है। लालच दे रही है। 18 साल तक कोई खबर नहीं ली और अब चुनाव आते ही आदिवासी याद आने लगे। आदिवासी इनके बहकावे में नहीं आएंगे। आदिवासियों की लड़ाई कांग्रेस लड़ रही है। उन्होंने कहा कि, जयस कांग्रेस से जुड़ा संगठन है। जयस के नेताओं को भी हम कांग्रेस में उचित जगह देंगे। जयस भी हमारे साथ एकजुट होकर लड़ें। भूरिया ने कहा कि पार्टी सभी आदिवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए ही आगामी चुनाव में टिकट वितरण में भी प्रतिनिधित्व का ख्याल रखेगी।