अक्षय पात्र रसोई
अक्षय पात्र रसोई

भोपाल। राजधानी में आज से स्कूली बच्चों को आधुनिक मशीनों से तैयार हाइजिन खाना उपलबध कराया जाएगा। इसके लिए अक्षय पात्र फाउंडेशन ने पहल की है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान वर्चुअल शुभारंभ किया है। राजधानी की तहसील कोलार (शाहपुरा पुलिस थाने के पास ) में अक्षय पात्र फाउण्डेशन की प्रदेश कि सबसे बड़ी रसोई है।

उक्त रसोई से प्रतिदिन 50 हजार स्कूली विधार्थियों को पीएम पोषण कार्यक्रम के तहत प्रतिदिन मध्यान्ह भोजन (मिड डे मील) परोसा जायेगा। कार्यक्रम में विशिष्ठ अतिथि के रूप में प्रदेश के पंचायत राज मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया, स्कूली शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार, विश्वास सारंग, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर सांसद भोपाल, कृष्णा गौर विधायक गोविन्दपुरा, रामेश्वर शर्मा, आरिफ अकील, पीसी शर्मा, आरिफ मसूद, मालती राय महापौर भोपाल, रामकुंवर गुर्जर जी अध्यक्ष जिला पंचायत भी भाग लिए ।

अध्यक्षता अक्षय पात्र फाउण्डेशन के वाईस चेयरमैन चंचलापति दास एवं एच इ जी लिमिटेड के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर रवि झुनझुनवाल ने किया। इस मौके पर फाउण्डेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष (संचालन एवं परियोजना) भरतर्षभ दास, एच ई जी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मनीष गुलाटी भी मौजूद रहें। फाउण्डेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भरतर्षभ दास ने बताया कि देश में कोई भी बच्चा भूख के कारण शिक्षा से वंचित ना रहे, इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर फाउण्डेशन द्वारा कार्य किया जा रहा है। यह देश भर में फाउण्डेशन की 66 वीं किचन होगी।

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50 हजार बच्चों के लिए एक घंटे में तैयार होगा भोजन-

संस्था की मानें तो 12 करोड़ की लागत से तैयार हुए इस कीचन में आधुनिक मशीनें लगाई गई जिनकी सहायता से राजधानी के 50 हजार बच्चों को प्रतिदिन भोजन मिलेगा। उक्त किचन के जरिये 50 हजार शासकीय स्कूली बच्चों को प्रतिदिन मध्यान्ह भोजन उपलब्ध करवाया जा सकेगा। अक्षय पात्र देश भर में अपनी भोपाल की ये रसोई के खुलते ही प्रतिदिन 22 लाख विद्यार्थियों को 15 राज्यों के 20 हजार से अधिक विधालयों में भोजन उपलब्ध करवाया जा रहा है। संस्था की मानें तो इतने विद्यार्थियों को प्रति साल भोजन उपलब्ध कराने पर 7.5 करोड़ का खर्च आएगा।

एक घंटे में तैयार होंगी 20 हजार रोटियां-

अक्षय पात्र की उक्त किचन बेहद आधुनिक है इसमें मशीनों के जरिये रोटी, सब्जी, दाल व चावल तैयार किये जायेगें। एक बार में करीब एक क्विंटल आटा गुंथने की मशीन एवं चपाती मशीन से 20 हजार रोटियां प्रति घंटे बनाई जा सकेगी। साथ ही एक बार में 1200 लीटर दाल व 125 किलो चावल बन सकेगा। एक एकड़ में फैली उक्त किचन से 900 विद्यालयों के 50 हजार विधार्थियों तक भोजन पहुँचायेगा।

इसके लिए करीब 150 कर्मचारी प्रतिदिन भोजन बनाने में जुटेगें। किचन की साफ-सफाई के लिए भी बेहद शानदार व्यवस्था की गई है। किचन के माध्यम से अक्षय पात्र फाउण्डेशन द्वारा सरकारी विद्यालय के विधार्थियों को अच्छा व पौष्टिक भोजन दिया जायेगा। उल्लेखनीय है कि फाउण्डेशन सन् 2000 से इस क्षेत्र में सक्रिय है, तथा आज यह विश्व में सबसे अधिक मध्यान्ह भोजन प्रदान करने वाली संस्था है। विश्व की प्रसिद्ध हार्वर्ड विश्व विद्यालय में भी इसके ऊपर विशिष्ट अध्ययन किया गया है।