भोपाल। लाडली लक्ष्मी से लेकर बेटियों के काम्यदान के लिए फिक्रमंद मप्र की शिवराज सिंह सरकार ने भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (IISF) के 8वें आयोजन को भी महिला प्रधान बना दिया। महोत्सव की सूत्रधार से लेकर जमीनी स्तर काम करने वालों में महिलाओं का बड़ा हिस्सा दिखाई दिया। तो विज्ञान और कला के संगम की कोशिश के साथ जोड़े गए आर्टिजन में भी इनकी बड़ी तादाद शामिल नज़र आई। महिलाओं से हटकर जिन कंधों पर इस आयोजन की जिम्मेदारी थी, उनके सहयोग करने वालों में भी महिला टीम का नजारा देखने को मिला।

साइंस फेस्टिवल के चार दिन के समारोह की बागडोर

काउंसिल ऑफ साइंटफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) का महानिदेशक वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नल्लाथंबी कलाइसेल्वी ने संभाल रखी थी। दिल्ली से लेकर भोपाल तक अपने कौशल का जादू दिखाते हुए डॉ कलाइसेल्वी ने कार्यक्रम की गरिमा और इसके वर्चस्व को बरकरार रखने में महारत हासिल की। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नल्लाथंबी कलाइसेल्वी सीएसआईआर की पहली महिला महानिदेशक हैं। इसके अलावा वे डिपार्टमेंट ऑफ साइंटफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (DSIR) के सचिव की जिम्मेदारी भी सम्हाल रही हैं। डॉ कलाइसेल्वी की मंशा अनुसार महोत्सव को आकार देने में भोपाल राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की फेकल्टी में शामिल डॉ सारिका वर्मा ने अहम भूमिका निभाई। विभागीय अधिकारियों के अलावा महोत्सव में शामिल होने आने वाले वैज्ञानिकों और अन्य मेहमानों को सत्कारपूर्वक सहेजने की जिम्मेदारी उन्होंने बखूबी निभाई।

प्रो राजीव की मंडली में भी महिला सशक्तिकरण

दिल्ली यूनिवर्सिटी के चटक और सक्रियता से काम को अंजाम देने में आगे रहने वाले प्रो राजीव वर्मा भोपाल से पहले गोवा और पूर्व के साइंस फेस्टिवल को रंगत देने के माहिर माने जाते हैं। कोविड से भयभीत होकर जी रहे लोगों को गोवा फेस्टिवल2022 में जोड़ने में प्रो राजीव ने महती भूमिका निभाई थी। सामान्य से लेकर साधारण तक दिखाई देने वाली जीवनशैली के कायल प्रो राजीव अपनी टीम में सुरभि अग्रवाल, सुनिधि अरोड़ा जैसी एक बड़ी कन्या मंडली को साथ लेकर चलते हैं। अपनेपन और सकारात्मक रवैए से वे इस टीम से हमेशा बेहतर काम लेते आए हैं। जिसका नजारा भोपाल फेस्टिवल में भी नजर आया। भोपाल टीम से कामना भी सहयोग के लिए फिक्रमंद दिखाई दे रही थीं।

….और विज्ञान कला के संगम में हुमा

विज्ञान और कला के समागम से निकल रहे नए तार को पिरोती मप्र की इकलौती जरी जरदोजी स्टेट अवार्ड हुमा खान भी इस आयोजन में सक्रिय दिखाई दीं। वैज्ञानिक आधार को कपड़ों पर जरी जरदोजी से सजाती हुमा खान जब मंच पाती हैं तो वे फर्राटे से विज्ञान और कला के संगम को विस्तार से बताती भी जाती हैं और इसके लिए खुद को गौरांवित महसूस भी करती जाती हैं। हुमा के अलावा एक बड़ा महिला समूह इस फेस्टिवल में अपनी मौजूदगी लिए मौजूद है।

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नीरस विज्ञान में मनोरंजन के रंग

आमतौर पर नीरस और बेस्वाद रहने वाले विज्ञान कार्यक्रमों से हटकर साइंस फेस्टिवल कुछ अलग अंदाज लिए हुए था। यहां विज्ञान, प्रयोग, आविष्कार और नवाचार की गाढ़ी बातें हुई। देश दुनिया के हजारों विज्ञान से जुड़े वैज्ञानिकों, आविष्कारकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने इस चार दिन के समागम से अपने मतलब का बहुत कुछ उठाया। साथ ही इनके मनोरंजन और स्वस्थ्य दिनचर्या के लिए सांस्कृतिक और बौद्धिक कार्यक्रमों का यहां इंतजाम किया गया था। आयोजन के पहले दिन विख्यात सूफी गायक कैलाश खैर की संगीतमय प्रस्तुति ने लोगों का मन मोहा। अगले दिनों में यहां राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बैंड, लघु नाटिका और राष्ट्रीय स्तर के कवियों से सजे कवि सम्मेलन का लुत्फ भी मेहमानों ने उठाया।