Pakistan Crisis

Pakistan Crisis: पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति गंभीर परिस्थितियों का सामना कर रही है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि यह शर्म की बात है कि एक देश, जो एक परमाणु शक्ति संपन्न है, उसे भीख और वित्तीय मदद मांगना पड़ रहा है। शरीफ ने कहा कि मित्र देशों से अधिक ऋण मांगना उनके लिए शर्मनाक है। उन्होंने इस बात पर भी जोर देते हुए कहा कि देश के वित्तीय संकट का स्थायी समाधान नहीं है।

पिछली सरकारों ने नहीं किया समाधान-

उन्होंने शनिवार को पंजाब प्रांत की राजधानी लाहौर में पाकिस्तान प्रशासनिक सेवा (पीएएस) के परिवीक्षाधीन अधिकारियों के पासिंग आउट समारोह को संबोधित करते हुए यह बयान दिया। जियो न्यूज के हवाले से पाकिस्तान के पीएम ने कहा कि यह वास्तव में खेदजनक है कि पिछले 75 वर्षों के दौरान, विभिन्न सरकारें – चाहे राजनीतिक नेतृत्व या सैन्य तानाशाहों के नेतृत्व में – आर्थिक चुनौतियों का समाधान नहीं कर सकीं।

पाकिस्तान का सबसे खराब आर्थिक संकट-

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के आर्थिक मुद्दों को हल करने के लिए विदेशी ऋण मांगना सही समाधान नहीं था क्योंकि ऋण को अंततः वापस करना होगा। चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों (जुलाई-अक्टूबर) में मुद्रास्फीति के 21-23 प्रतिशत के बीच उच्च रहने और देश के राजकोषीय घाटे के 115 प्रतिशत से अधिक बढ़ने के अनुमान के साथ पाकिस्तान अपने सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।

सऊदी अरब और यूएई से मिल रही वित्तीय सहायता-

350 अरब रुपये की अर्थव्यवस्था वाले देश को मुख्य रूप से दो प्रमुख देशों – सऊदी अरब और यूएई से वित्तीय सहायता मिल रही है। पिछले हफ्ते, यूएआर के अध्यक्ष शेख मोहम्मद बिन जायद ने शरीफ की देश की यात्रा के दौरान पाकिस्तान को 1 बिलियन अमरीकी डालर का और ऋण देने की घोषणा की।

देश में बिगड़ती आर्थिक स्थिति के पीछे राजनीतिक संकट, रुपये में गिरावट, मुद्रास्फीति, वैश्विक ऊर्जा संकट, पिछले साल की विनाशकारी बाढ़ सहित कई कारक हैं।