Death by drowning
Death by drowning

खरगोन। मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में घर से खेलने निकले तीन मासूम की पानी में डूबने से मौत हो गई। घटना ऊन थाना क्षेत्र के मोठापुरा गांव की है। इस दर्दनाक घटना से पूरे गांव में मातम पसर गया है। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच में जुट गई है।

पानी में तैरती मिली लाश –

घटना मोठापुरा गांव की है, विक्रम पिता घनश्याम (8 वर्ष), वंश पिता रविंद्र (9 साल), प्रितेश पिता रामलाल (13 साल) घर से खेलने के लिए निकले थे, लेकिन वो गायत्री मंदिर के पीछे स्थित पानी भरे गड्ढे में टायर से तैरने चले गए। इस दौरान तीनों डूब गए।

काफी देर बाद भी वो घर नहीं लौटे तो परिजन ढूंढने निकले, तब तीनों की लाश पानी में तैरती हुई मिली। परिजनों ने तीनों को बाहर निकालकर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने भी चेक करने के बाद मृत घोषित कर दिया।

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गैस पीड़ित संगठनों का आरोप : मर्जी से आते हैं डॉक्टर, आयुक्त से मांगा जवाब

भोपाल। भोपाल शहर के गैस पीड़ितों को इलाज मुहैया कराने के लिए स्थापित गैस राहत अस्पतालों की बदहाली के मामले में मप्र मानव अधिकार आयेाग ने संज्ञान लिया है। गैस पीड़ित संगठनों ने कमला नेहरू गैस राहत अस्पताल में डॉक्टरों पर अपनी मर्जी से ड्यूटी करने का आरोप लगाए हैं। मामले में आयोग ने संचालक, गैस राहत, भोपाल एवं आयुक्त, स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय को मामले की जांच कराने के निर्देश दिए हैं और 15 दिन के भीतर जवाब मांगा है।

आयोग से मिली जानकारी के अनुसार, मामले में डॉक्टरों के खाली चैंबरों के फोटो भी सोशल मीडिया पर वायरल होने से बदहाली और अव्यवस्थाओं की तस्वीर उजागर हुई है। बीते सोमवार की सुबह 09:50 बजे तक कमला नेहरू गैस राहत सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल में केवल एक डॉक्टर मौजूद था, जबकि सुबह यहां 12 डॉक्टरों की ड्यूटी रहती है। वहीं जिंन डॉक्टर की ड्यूटी सुबह 08 बजे से शुरू होती है, वो भी 09:50 पर ड्यूटी पर उपस्थित हुए। लगभग दो घंटे तक आईसीयू में कोई डॉक्टर ही नहीं था।

मरीजों के साथ खिलवाड़ –

गैस पीड़ित संगठनों के मुताबिक यह मरीजों के साथ गंभीर खिलवाड़ है कि पूरे अस्पताल में सिर्फ दो एमडी डॉक्टर मौजूद रहे। एमडी डॉक्टर दोपहर एक बजे आते हैं और दो बजे चले जाते हैं। यहां एक गायकोनोलॉजिस्ट डॉक्टर हैं, जो 12 बजे आतीं हैं और मुश्किल से एकाध मरीज को देखतीं हैं। कुल मिलाकर एक दर्जन डॉक्टर अस्पताल में होने के बाद भी मरीज यहां इलाज के लिये परेशान होते नजर आते हैं।

रोजाना खतरे के बीच आवाजाही करते हैं एक हजार वाहन चालक –

भोपाल शहर के ई-3, नुपुर कुंज से मीरा नगर फेज 2, दाना पानी रोड की तरफ जाने वाली एक किमी लंबी सड़क जर्जर हो चुकी है। डामर पूरी तरह से उखड़ गया है और रोड़ पर गिट्टी-पत्थर बिखरे पड़े हैं। इतना ही नहीं जगह-जगह चैंबर के आसपास गहरे गडढ़े हो गये हैं। इस कारण आए दिन वाहन चालक दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। बड़े-बड़े गड्ढ़ों में चार पहिया वाहन फं स जाते हैं।

रात के समय तो खतरा और बढ़ जाता है, क्योंकि स्ट्रीट लाइट बंद रहती है। बीते पांच साल से ऐसे ही हालात बने हुये हैं। मामले में आयोग ने संभागीय यंत्री, लोक निर्माण विभागक को मामले की जांच कराने के निर्देश दिए हैं और जवाब तलब किया है।