भोपाल। जिस समय प्रदेश की प्रतिष्ठा से जुड़े प्रवासी भारतीय सम्मेलन और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के आयोजन में सरकार व्यस्त है, उसी मौके को चुनकर करणी सेना ने राजधानी में हंगामे की योजना बनाई है। करीब चार दिन से जारी इस सम्मेलन, भूख हड़ताल और हंगामे में दस लाख से ज्यादा लोगों को जुटाने का ऐलान था, लेकिन संख्या नीचे आते हुए सीमित होती गई। सरकार की प्रतिष्ठा से जुड़े आयोजनों के बीच किए जा रहे इस हंगामे को मांगें मनवाने से ज्यादा सीएम शिवराज को डिस्टर्ब करने की सियासत माना जा रहा है।

3 लाख से ज्यादा राजपूतों के एकत्रित होने का दावा

आगामी चुनावों से पहले अपनी 21 सूत्रीय मांगों को लेकर करणी सेना ने मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग, जातिगत आरक्षण की पुन: समीक्षा और एट्रोसिटी एक्ट के विरोध सहित 21 सूत्रीय मांगों को लेकर रविवार को भेल जंबूरी मैदान पर राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना द्वारा महाआंदोलन आयोजित किया गया। जंबूरी मैदान में मध्यप्रदेश के अलावा हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के कार्यकर्ता पहुंचे। मैदान पर 3 लाख से ज्यादा राजपूतों के एकत्रित होने का दावा किया गया है। मैदान में युवा और करणी सेना के लोग ‘माई के लाल’ के नारे लगा रहे थे। आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग को लेकर नारेबाजी की गई। इस जनआंदोलन को ब्राह्नाण और पाटीदार समेत अन्य समाज का समर्थन भी बताया गया है।

यातायात प्रभावित

इस महाआंदोलन के कारण भेल के आस-पास की सड़कों पर जाम लग गया। भेल महात्मा गांधी चौराहे से अवधपुरी, आनंद नगर तक भीड़ जमा हो गई। बढ़ती भीड़ को देखकर ट्रैफिक पुलिस ने जंबूरी मैदान की ओर जाने वाले रास्‍तों पर ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया था। जिससे लोगों को खासी परेशानी उठाना पड़ी।

हम जिंदा हैं, गुलाम नहीं

संगठन के प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर कहते हैं कि 8 जनवरी का हमारा जन आंदोलन शांति पूर्वक व लोकतांत्रिक तरीके से था। हम यह कतई नहीं चाहते थे कि हमारे भाइयों को किसी को कोई नुकसान हो। ये कार्यक्रम अच्छे से संपन्न हुआ और सब लोगों को हमने अच्छे से वापस घर भेजा। इस आंदोलन ने पूरे प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश में सुर्खियां बटोरी है। भोपाल के जंबूरी मैदान में चल रहे इस आंदोलन में बड़ी संख्या में करणी सेना के सदस्य शामिल हुए हैं।

अब अनशन पर करणी सेना परिवार के प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर समेत 5 कार्यकर्ता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। वहीं पांच-पांच लोगों की कमेटियाँ बैठेगी। जब तक मांग पूरी नहीं होती है, तब तक तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा। करणी सेना प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर ने कहा कि मैदान में ‘माई के लाल’ का नारा बहुत गूंजा है लेकिन सरकार उसको अपना विरोधी मान लेती है, जिसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यहाँ सभी माई के लाल ही हैं, वह आंदोलन को दबाना चाहेगी। इस प्रकार के दबाव बनाए जायेंगे। फिर हम कैसा महसूस करेंगे कि हम आजाद हैं। सरकारों ने हमें गुलामी का एहसास कराया है तब हम ने उनको एहसास कराया है कि हम जिंदा हैं गुलाम नहीं।