आपके खाने में पॉजिटिव एनर्जी है! भोजन पकाते समय इस छोटी सी बात का रखें ख्याल

Health Tips: भोजन पकाते समय यदि इस छोटी सी बात का रखेंगे ख्याल, तो आपका परिवार रहेगा स्वस्थ और खुशहाल

chandana tiwari

सारांश टाइम्स। आपका भोजन आपके शरीर को सेहतमंद बनाएगा अथवा बीमार करेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसमें पॉजिटिव (positive) एनर्जी है या नेगेटिव एनर्जी (negative energy)। यह अत्यंत महत्वपूर्ण बात है जिस पर आमतौर पर हम में से अधिकांश लोगों का ध्यान नहीं जाता है। आपके भोजन और सेहत से जुड़ी अत्यंत महत्वपूर्ण जानकारी साझा कर रही हैं देश विदेश में ख्यात एस्ट्रोलाजर (Astrologer) चांदना तिवारी। सुश्री तिवारी ज्योतिष (Astro) से जुड़े विभिन्न विषयों पर सारांश टाईम्स में नियमित रूप से लिखती हैं।

आमतौर पर जब भी हम खाने के बारे में बात करते हैं तो तीन बातों पर ध्यान देते हैं। सबसे पहली बात हमारे खाने का स्वाद, दूसरे नंबर पर हम इस बात का ख्याल रखते हैं कि हमारा खाना पौष्टिक है या नहीं। अर्थात हमारे भोजन से हमें कितने पोषक तत्व मिल रहे हैं और तीसरी बात उन लोगों से जुड़ी है जो अपनी फिटनेस का बहुत ज्यादा ध्यान रखते हैं और जानना चाहते हैं कि खाने की कैलोरी वैल्यू क्या है।

इन तीनों बातों से भी कहीं अधिक महत्वपूर्ण तथ्य है खाने की एनर्जी। दरअसल हमारे खाने में पॉजिटिव और नेगेटिव दो तरह की एनर्जी होती है और सबसे खास बात यह है कि इसे नापा नहीं जा सकता है जिस तरह हमारा भोजन हमारे शरीर पर असर डालता है, उसी तरह ये दोनों एनर्जी हमारी आत्मा और मन पर असर करती है। इसीलिए भारतीय संस्कृति में कहा जाता है कि यथा अन्नम तथा मन्नम‘।

भोजन में प्रभाव डालती है पॉजिटिव, नेगेटिव एनर्जी

हमारे भोजन पर पॉजिटिव और नेगेटिव एनर्जी के असर के उदाहरण अक्सर हम अपने आसपास ही देखते हैं। कई बार ऐसा कोई व्यक्ति जो बहुत बीमार हो या मानसिक अथवा भावनात्मक रूप से बहुत बुरे दौर से गुजर रहा हो, उसे किसी साधु-संत ने प्रसाद अथवा कोई अभिमंत्रित खाद्य वस्तु दी और उसे खाकर वह व्यक्ति ठीक हो जाता है अथवा पहले से अधिक स्वस्थ और अच्छा अनुभव करता है। अब आप पूछेंगे ऐसा कैसे होता है। इसका कारण है अभिमंत्रित करने से इस भोजन में पॉजिटिव एनर्जी शामिल हो जाती है।

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पॉजिटिव एनर्जी की तरह ही नेगेटिव एनर्जी होती है, जिसे आमतौर पर टोना-टोटका कहते हैं। टोना टोटका की प्रक्रिया में किसी व्यक्ति को कोई ऐसी चीज खिला दी जाती है, जिसमें नेगेटिव एनर्जी को मिलाया गया होता है। कहा जाता है कि इस तरह की प्रक्रिया से वह व्यक्ति शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से बीमार हो जाता है तथा अपने जीवन में कई तरह की परेशानियों का अनुभव करने लगता है।

क्या होती है भोजन में सकारात्मक ऊर्जा

खाने में सकारात्मक ऊर्जा का एक और उदाहरण कमोवेश हम सभी ने अपने जीवन में देखा है। हमारे घरों में भगवान की पूजा के लिए प्रसाद बनता है। इसमें ना तो ज्यादा तेल मसाले डाले जाते हैं और ना उसे चखा जाता है, बल्कि कई बार तो भगदान के भोग के लिए बनाई जाने वाली सब्जी को मात्र जीरे से छोका जाता है, इसके बावजूद उसका स्वाद लाजवाब होता है।

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि भोग प्रसाद को अत्यंत श्रद्धाभाव से बनाया जाता है और उसमें ईश्वर के प्रति हमारा प्रेम और आस्था घुली हुई होती है। ऐसा ही अनूठा स्वाद होता है मां के हाथ के बने खाने का, जो दुनिया में सबको बहुत अच्छा लगता है। दरअसल मां जो खाना बनाती है, उसमें उसका वात्सल्य और ममता मिली हुई होती है। मां भी भोजन तैयार करते समय उन्हीं मसालों और तेल का इस्तेमाल करती है, जो घर की खाना बनाने वाली महाराजन इस्तेमाल करती है या होटल अथवा रेस्टोरेंट में इस्तेमाल किए जाते हैं.. इसके बावजूद मां के हाथ के बने खाने का स्वाद ही अलग होता है।

दरअसल मां के हाथ के बने खाने में वात्सल्य वाली एनर्जी मिक्स हो जाती है। अब सवाल आता है कि हम किस तरह अपने रोजमर्रा की जिंदगी में अपने भोजन को नेगेटिव एनर्जी से बचा सकते है और उसमें और ज्यादा पॉजिटिव एनर्जी मिक्स कर सकते हैं कि वह हमारे परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य के लिए और उनकी आत्मा तथा मन के लिए भी अच्छा हो।

ऐसे बनाएं पॉजिटिव एनर्जी से युक्त भोजन

आप जब भी किचन में खाना बनाने के लिए जाएं, तो किचन में प्रवेश करते ही मां अन्नपूर्णा का ध्यान करें और आंख बंद करके प्रार्थना करें कि आप जो भी भोजन बनाने जा रही है, वह खाने वालों के मन, शरीर और आत्मा को स्वस्थ रखे उसके बाद आप खाना बनाना शुरू करें। आप पाएंगे कि आपका बनाया भोजन ना सिर्फ सबको स्वादिष्ट लगेगा, अपितु वह सेहत बढ़ाने वाला भी होगा।

दूसरा उपाय जो आप किचन में कर सकती हैं वह यह कि आप अपने किचन में ऐसी जगह जहां आपकी लगातार नजर पढ़ती हो, कुछ मंत्र एक कागज पर लिखकर उस कागज को दीवार पर चिपका दीजिए। अब जब भी आप खाना बनाएं तो इन मंत्रों का लगातार जाप करते रहें। यदि ऐसा करना संभव ना हो तो कम से कम 11 बार इन मंत्रों का जाप करें इन मंत्रों में सबसे पहला मंत्र गायत्री मंत्र है जो ऊर्जा प्रदान करने वाला मंत्र है।

मंत्रों से भोजन में बढ़ा सकते हैं पॉजिटिव एनर्जी

किचन में पढ़ा जाने वाला दूसरा मंत्र है महामृत्युंजय मंत्र क्योंकि इस मंत्र से हमें जीवन की ऊर्जा मिलती है। तीसरा मंत्र जिसका आपको जाप करना चाहिए वह है ओम नमः शिवाय। यह मंत्र उन घरों के लिए अच्छा है, जहां छोटे बच्चे हैं और अभी पढ़ाई कर रहे हैं अथवा अपना कैरियर बनाने की तैयारी कर रहे हैं। इस मंत्र के जाप से घर के बच्चों में एकाग्रता का स्तर बढ़ेगा और वे अपनी परीक्षाओं की बेहतर ढंग से तैयारी कर सकेंगे।

यह मंत्र उन घरों में भी पढ़ा जाना चाहिए जहां पति-पत्नी में झगड़े होते हैं या पारिवारिक कलह ज्यादा होता है। ऐसे घर की गृहणी जब ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करेगी, तो मंत्र की सकारात्मक ऊर्जा भोजन में मिल जाएगी। इस तरह आप प्रतिदिन जो खाना बनाती हैं, वही प्रसाद बन जाएगा इस खाने को खाने से न सिर्फ पॉजिटिव एनर्जी प्राप्त होगी, बल्कि आपके पार्टनर का मन भी शांत होता चला जाएगा और घर में आपसी झगड़े बंद हो जाएंगे।

खाना बनाने वाली मेड के व्यवहार से भी बनती है एनर्जी

आजकल ज्यादातर घरों में खाना बनाने के लिए मेड या बाई रखी जाती है। सवाल उठता है ऐसे घरों में भोजन में पॉजिटिव एनर्जी शामिल करने के लिए क्या किया जाए? इसका आसान सा समाधान यह है कि ऐसे घरों में भोजन परोसने की जिम्मेदारी गृह स्वामिनी स्वयं संभाल ले और खाना सर्व करते समय मंत्र का जाप कर ले।

कई घरों में खाना सर्व करने का काम भी मेड या सर्वेट ही करते हैं, वहां गृह स्वामिनी को डाइनिंग टेबल पर रखे खाने को एक बार कड़छी से चला देना चाहिए और ऐसा करते समय वह मंत्र का जाप कर ले खाने में शुमार रोटी या चावल जिसे कड़छी से नहीं चलाया जा सकता है। उसके केसरोल को दोनों हाथों से पकड़कर मंत्र जाप किया जा सकता है। इससे भी पॉजिटिव एनर्जी कुछ ना कुछ मात्रा में उस भोजन में मिल जाएगी। वैसे गृह स्वामिनी की कोशिश होनी चाहिए कि वह कोई न कोई चीज अपने हाथों से बनाकर परिवार के सदस्यों को खिलाएं।

आप घर में मेड रखते समय इस बात का ध्यान रखें कि वह सकारात्मक सोच वाली हो। ऐसी मेड जब खाना बनाएगी, तो उसके बाइब्रेशंस पाजिटिव होंगे इस बात का ध्यान रखें कि जो महिला आपके घर में खाना पकाती है, वह आपके व्यवहार से प्रसन्न रहें। यदि खाना बनाते समय वह नाराज रहेगी, तो बेमन से खाना बनाएगी और आपके खाने में पॉजिटिविटी नहीं आ पाएगी तथा उसकी नकारात्मक ऊर्जा खाने में मिल जाएगी।

घरेलू कलेश से आती है नेगेटिव एनर्जी

जिन घरों में अक्सर कलह होती है और महिलाओं को अपशब्द कहे जाते हैं या उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जाता है, वहां जब ये खिन्न अवस्था में भोजन पकाती है, तो उनके बनाए खाने में नकारात्मक ऊर्जा मिक्स हो जाती है। महिलाओं को यह भी देखना चाहिए कि ये खाना बनाते समय छोटी-छोटी बातों पर नाराज ना हो। यदि कोई कुछ कह दे तो उसका बुरा ना मानें और प्रसन्न चित्त होकर भोजन पकाएं। जिन घरों की स्त्रियां बेमन से खाना पकाती हैं, उनके बनाए भोजन में पॉजिटिव एनर्जी नहीं आ पाती है।

इसके उलट ऐसे खाने में नेगेटिव एनर्जी आ जाती है। ऐसा भोजन परिवार के हर सदस्य पर नकारात्मक असर डालता है। इसलिए हमेशा प्रसन्न और पॉजिटिव सोच के साथ खाना बनाना चाहिए। ऐसा खाना आपके शरीर, मन और आत्मा को प्रसन्न करेगा। यह पाया गया है कि यदि कोई महिला प्रसन्नचित होकर खाना बनाती है, तो ऐसा खाना पॉजिटिव एनर्जी से भरपूर होता है। ऐसी महिला यदि चटपटा और मसालेदार खाना भी बना दे, तो वह भी स्वादिष्ट और पॉजिटिव एनर्जी से लबरेज होता है।